"मोहब्बत इंसानो से" -🖋 राशिद अंसारी


मोहब्बत लुटाकार मोहब्बत को पाना सीखा, 
बिन कहे कुछ भी सबकुछ केह जाना सीखा, 

सीखा बड़े बुज़ुर्गों की इज्जत करना, 
सीखा छोटे मासूमों से मोहब्बत करना, 

सिखा ज़िंदगी जीने का तरीका अपनो से, 
खुद को तकलीफ पहुंचाकर दुसरो को हसाना सीखा, 

खुदा ने हमें इंसान किसी वजह से ही बनाया होगा, 
इस वजह को ढूंढकर अपनी मंजिल बनाना सीखा, 

नेक राह पे चलूं हमेशा, कभी ना दुखाऊँ किसी का दिल, 
काम आऊँ रोज़ किसी न किसीके, 
बस यही आरज़ू लिए राह पे चले चलना सीखा ! 



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