मेरी कुछ छोटी रचनाएँ - मोहब्बत
1. साये मे तेरे हमने मोहब्बत को जाना है और तुझे ही हमने अपनी मंजिल अपना खुदा माना है ! 2. दिल का सुकून पाने चले थे मोहब्बत में उसके खुद को मिटाने चले थे दिल तोड़ दिया उसीने जिन्हें हम अपना बनाने चले थे ! 3. दिल में बसाया है तुमने आँखों में छुपाया है तुमने हम तो अंजान थे मोहब्बत से मोहब्बत क्या होती है इसका एहसास दिलाया है तुमने ! 4. क्या तारीफ करूँ तेरे हुस्न की जिसे फूलों से सजाया है उपर वाले ने तुझे बड़ी फुरसत से बनाया है ! 5. दिल मे मोहब्बत के चिराग जलाये रखेंगे साँसों मे तेरी साँसों को बसाये रखेंगे तु एकबार हां कह के तो देख तुझे दिल के किसी खास कोने मे छिपाये रखेंगे ! 6. लगता है दिल के अरमाँ अधूरे रह जायेंगे साँसों मे मोहब्बत के एहसास अधूरे रह जायेंगे आँखों मे जो सपने संजोये है हमने लगता है ये ख्वाबों के आशियाँ अधूरे रह जायेंगे !